मध्य प्रदेश: सिंगरौली में विकास के दावों की खुली पोल, उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर मासूम

News Desk19 August 20262 min read0 viewsदेश
मध्य प्रदेश: सिंगरौली में विकास के दावों की खुली पोल, उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर मासूम

सिंगरौली: जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की तस्वीरें भी सामने आने लगी हैं। सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। इस वीडियो में मासूम स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर एक उफनती नदी को पार करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

​जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने की मजबूरी

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो चितरंगी क्षेत्र की ग्राम पंचायत पराई का है। वीडियो में नजर आ रहे मासूम बच्चे सुखारा टोला के निवासी हैं, जो पराई स्थित अपने स्कूल में पढ़ने जाने के लिए उफनती नदी को पार करने पर मजबूर हैं। तेज बहाव और गहरे पानी के बीच अपनी किताबों व बस्ते को भीगने से बचाने के लिए बच्चे स्कूल बैग को सिर पर उठाकर नदी पार कर रहे हैं।

चितरंगी के पराई क्षेत्र का वायरल वीडियो

​वायरल वीडियो सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे बच्चे ग्राम पंचायत पराई के सुखारा टोला के रहने वाले हैं। यह बच्चे पराई स्थित अपने स्कूल पहुंचने के लिए रोजाना उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। ​गहरे और तेज बहाव वाले पानी से अपनी किताबों को बचाने के लिए बच्चे स्कूल बैग को सिर पर रखकर नदी पार करते दिख रहे हैं।

​करीब 100 बच्चों का भविष्य दांव पर

​स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, सुखारा टोला से पराई स्कूल तक पहुँचने के लिए उफनती नदी को पार करने के अलावा कोई अन्य सुरक्षित रास्ता या पुल उपलब्ध नहीं है। ​इस विकट समस्या से इलाके के लगभग 100 बच्चे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

​हर साल बरसात के दिनों में बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए इस तरह की जानलेवा परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

​वीआईपी क्षेत्र में भी बदहाल व्यवस्था, उठे सवाल

यह पूरा मामला राज्यमंत्री राधा सिंह के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। वीआईपी क्षेत्र होने के बावजूद हर साल बारिश में ऐसी ही भयानक तस्वीरें सामने आती हैं, जो जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के विकास दावों पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।

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