उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर में लंबित भूमि विवाद को लेकर ग्रामीणों की गुहार, डीएम से तत्काल सुनवाई और खेती की अनुमति की मांग

Wasim10 August 20262 min read0 viewsदेश
उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर में लंबित भूमि विवाद को लेकर ग्रामीणों की गुहार, डीएम से तत्काल सुनवाई और खेती की अनुमति की मांग

मिर्जापुर: जिले के ग्राम चिंतामनपुर, परगना कांतित, तहसील सदर के रहने वाले ग्रामीणों ने अपने लंबित मुकदमे को लेकर जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुकदमे में लंबे समय से कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो रही है, जिसके चलते वे परेशान हैं और उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन पत्र में फजले करीम, अतफर असलम और अकमल पुत्रगण स्वर्गीय हफीज समेत ग्रामवासियों ने बताया कि उनकी ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र से संबंधित मुकदमा वर्तमान में लंबित है। ग्रामीणों के मुताबिक, मामले में पहले न्यायालय स्तर से अपील भी प्रस्तुत की जा चुकी है और उसमें निष्पक्ष न्याय के संबंध में 6 अगस्त 2026 को आदेश होने की बात कही गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद अब तक मुकदमे में न तो नियमित रूप से सुनवाई हो रही है और न ही मामले को लेकर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई है। उनका आरोप है कि उन्हें जमीन के संबंध में जुताई-बोआई करने के लिए लेखपाल की टीम गठित कर जांच कराने की बात कही गई थी, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी इस संबंध में कोई जांच रिपोर्ट अथवा आदेश उन्हें नहीं दिया गया है।

प्रार्थना पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि मामले के लंबित रहने और जमीन पर कृषि कार्य न कर पाने के कारण उनके सामने जीवन-यापन और भोजन की समस्या खड़ी हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल मामले की सुनवाई कराते हुए लेखपाल की टीम गठित कर मौके की जांच कराने तथा रिपोर्ट मंगाकर उन्हें जमीन पर जुताई-बोआई करने की अनुमति दिए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि उनकी जमीन के संबंध में तत्काल आदेश जारी किया जाए, ताकि वे खेती का कार्य कर सकें और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि वे जिलाधिकारी से न्याय की उम्मीद लेकर दोबारा पहुंचे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि उपजिलाधिकारी के समक्ष लंबित अपील की सुनवाई निष्पक्ष एवं तत्काल कराई जाए, ताकि लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।

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