Gold Price Record High: 2025 में 1 लाख के पार जाएगा सोना? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स!

News Desk20 March 20252 min read0 viewsदेश
Gold Price Record High: 2025 में 1 लाख के पार जाएगा सोना? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स!

Gold Price Record High: इस साल की शुरुआत से ही सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल रही है। 1 जनवरी, 2025 को सोने का भाव 77,700 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 19 मार्च तक बढ़कर 91,950 रुपये तक पहुंच गया है। यानी पिछले ढाई महीनों में सोने की कीमतों में 14,000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रफ्तार जारी रही, तो जल्द ही सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू सकता है। क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें? एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज और करेंसी के प्रमुख अनुज गुप्ता ने बताया कि सोने की कीमतों में तेजी के पीछे मुख्य कारण इसकी बढ़ती मांग है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चीन और भारत समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापार युद्ध की आशंकाओं ने भी सोने की मांग को बढ़ावा दिया है। निवेशकों का रुख बदला: गुप्ता ने कहा कि सोने के प्रति निवेशकों की धारणा में काफी बदलाव आया है। अब लोग सोने को सिर्फ आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देख रहे हैं। इस वजह से सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति: अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोने की कीमत 3,039.22 डॉलर प्रति औंस हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति बनी रही, तो 2025 के अंत तक सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। हालांकि, अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होता है, तो सोने में निवेशकों की रुचि कमजोर हो सकती है। सोने की कीमतों में तेजी के मुख्य कारण:

  1. वैश्विक तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापार युद्ध की आशंकाओं ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई है।
  2. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने के लिए सोने की खरीदारी तेज कर दी है।
  3. गोल्ड ईटीएफ में निवेश: गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
  4. अमेरिकी फेड की नीतिगत बैठक: निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
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